Pilgrim of mankind - मानव तीर्थ - hindi poem - kuchlikha
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तुम धर्म जाति की बात करो
मैं इंसा होने की शर्त लगाता हूँ
तुम ख्वाहिश रखो सत्ता की
मैं रोटी की खोज में जाता हूँ
तुम नीति नियम की बात करो
मैं उजड़ों की बस्ती बसाता हूँ
तुम निंदा कटाक्ष के वचन बुनो
मैं पीड़ा के दंश मिटाता हूँ
मन्दिर मस्जिद की बात करो
मैं मानव का तीर्थ बताता हूँ
तुम अधिकारों का मार्ग रचो
मैं कर्तव्य पथ में जाता हूँ
तुम सागर सा खारा बन जाओ
मैं नीर नदी का बन जाता हूँ
तुम व्यापारी सा बन जाओ
मैं कृषक बन अन्न उगाता हूँ
तुम जज बनकर न्याय करो
मैं गीता पर हाथ रख कसम खाता हूँ.
- Sweta Pandey

बहुत खूब
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