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धुंध नहीं संकेत है - Not Just Smog But An Indication - hindi poem

धुंध नहीं संकेत है

धुंध नहीं संकेत है - Not Just Smog But An Indication - hindi poem - kuchlikha.com
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यह धुंध नहीं 
संकेत सा है। 
वसुधा को घेरता 
काल घना सा है। 
माँ को हर भांति 
लूट चुका वो, 
चन्द्र धरा उजेड़ने 
अब सज्ज सा है। 
यह धुंध नहीं 
संकेत सा है। 
पोषक माँ का पर्व-मरण, 
अति निकट सा है। 
नील ग्रह का वासी, 
जो मानव था कहलाया। 
संसाधन पर लूटा वो 
जैसे पशुता को अपनाया। 
मारुति में घोला उसने, 
अपने कर्मों का कालापन। 
अब हर श्वास है खोजे, 
हवा में मधुमय अपनापन। 
किन्तु जो है मिल रहा, 
वो जैसे मृत्यु सा है। 
यह धुंध नहीं 
संकेत सा है । 
प्रत्येक जीव का लगता, 
भावी कफन सा है।

- शिवानी लवानिया

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