उत्तर माँगती मैं उत्तरा - Uttara's Question Mahabharat - Hindi Poem
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| उत्तर माँगती मैं उत्तरा - Uttara's Question Mahabharat - Hindi Poem |
दिनकर के जगने से पूर्व
किया तिलक के साथ विदा जिसे,
अरे!अब शिविर में आने से पहले
कहाँ छोड़ आए हैं सब उसे?
कहाँ है वो नाहर-सा वीर खरा?
कहो,उत्तर माँगती,मैं उत्तरा!
क्या कहा?कि रण में वो योद्धा
आज वीरगति को प्राप्त हुआ?
और असंख्य वीरों का ये बाहुबल
न उसकी रक्षा को भी पर्याप्त हुआ?
क्या सत्य ही पांडु-वंश का दीपक
कपटियों ने मिलकर बुझा दिया?
क्या चक्रव्यूह में 7 अधर्मियों ने मिलकर
उस बालवीर को धरा पर गिरा दिया?
कैसे संभव हुआ ये अन्याय बड़ा?
कहो,उत्तर माँगती मैं उत्तरा!
क्यों उसके भूमि पर गिरने से पूर्व
न लज्जित हो सूर्य गिर पड़ा वहाँ पर?
क्यों नहीं ज्वालामुखी फट पड़े अरे
गिरा उसके रक्त का कण-कण जहाँ पर!
क्यों न शिव ने तीसरा नयन खोला
उसके नयन मूंदने से पहले?
क्यों न यमराज का भी हृदय डोला
उसको इहलोक से हरने से पहले?
क्यो हलाहल से ये जगत न भरा?
कहो,उत्तर माँगती मैं उत्तरा!
अरे!कल रैन वो वीर कहता था मुझसे,
"मैं अगली पीढ़ी के लिए,
हस्तिनापुर को जीतकर लाऊँगा!
सुनो मत्स्य-कुमारी!
मैं माँ पांचाली के दोषियों के शीश
चरणों में घसीटकर लाऊँगा!"
कैसे वो अपूर्ण छोड़ गया जो
निश्चय उसने कल ही था करा?
कहो,उत्तर माँगती,मैं उत्तरा!
अरे तेरह दिवसों से बार बार
सुहागनें विधवा हुई जाती हैं!
क्या दोष है नारी का जो
अपने प्रिय को खोकर आती है!
पुरुषो के पापों का दंड
क्यो नारियों ने सदा पाया है?
पुरुषों ने खेला कपट-द्यूत
तो क्यो नारी ने चीर गंवाया है?
क्यो बोझ सभी पाखंडो का
नारी के ही सिर है गिरा?
कहो,उत्तर माँगती,मैं उत्तरा !
क्यों इस युद्ध ने सुख मेरा
धीरे-धीरे छीन लिया?
प्राणो से प्यारा भाई मेरा
पहले तो इसने लील लिया!
अब मुझसे छीन लिया इसने
मेरा प्रियतम भी उसी भांति,
गर्भ मे लेकर जीती हूं
जिसकी अब इकलौती थाती!
मेरे प्रियजनों के रक्त से
कहो क्या पावन हो गई धरा?
कहो,उत्तर माँगती,मैं उत्तरा!
मेरा रुदन न देखो,करो न देरी
सूर्य आता है,फिर बजा दो रणभेरी!
जाकर फैलाओ विषाद
कर दो फिर जाकर शंखनाद!
रक्त से भूमि का उदर न होगा अभी भरा
पर,उत्तर माँगती,मैं उत्तरा!
बिछाओ मृत्यु का फिर बिछौन
अरे!क्यो सबके मुख हुए गौण?
क्यो कुरुवंश खड़ा है मौन?
अब उत्तर देगा कौन?
कहो,उत्तर माँगती,मैं उत्तरा!
- Mohini Uvach

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