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Fullmoon Night - पूर्णिमा की रात - Hindi Poem

Fullmoon Night - पूर्णिमा की रात

Fullmoon Night - पूर्णिमा की रात - Hindi Poem
Fullmoon Night - पूर्णिमा की रात - Hindi Poem
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आज फिर लहरों मे आग है,
लगता है पूर्णिमा की रात है,
उधर भी हाल बेहाल है,
चाँद भी दिख रहा बेकरार है,
कर बगावत दोनों मिलने को तैयार हैं,
पर ज़माने ने उठाई तलवार है,
लहरों ने दिखाई रफ़्तार है,
और चाँद कर रहा इंतज़ार है,
कुदरत ने खेली अपनी चाल है,
दोनो मे तड़प अपरंपार है,
पर ना हुई मुलाक़ात मुकम्मल,
यही तो असल बात है,
मत समझना की बुझ गयी चिंगारी,
ये तो, बस प्यार की शुरुआत है,
बादल ने दिया साथ,
आखिर दोस्ती की बात है,
बारिश के बहाने दोनो,
करते मुलाकात हैं।
सिर्फ साथ रहना ही प्यार है,
बिना मतलब की यह बात है,
अधूरे इश्क़ को मुकम्मल कहना,
नही सबके बस की बात है,
आज फिर लहरों मे आग है,
लग रहा पूर्णिमा की रात है।

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