Dream Rocks - स्वप्न शिलाएँ - hindi poem
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भंजित स्वप्न शिलाओं का,
भंजित स्वप्न शिलाओं का,
अब खंडहर तुम स्व साफ़ करो।
जो पीड़ा हो तो सह लेना,
नव सफर का तुम आगाज़ करो।
क्यूँ मन अंत में उलझा है?
जीवन नियम ये सुलझा है;
कि नव भोर तो आएगी तब ही,
जब घोर स्याह अँधेरा हो।
भंजित स्वप्न शिलाओं का,
अब खंडहर तुम स्व साफ़ करो।
अनेक विचार जो घेरे हैं,
अंतर्मन के जो अँधेरे हैं।
तोड़ के बंधन को इनके,
चित्त में उजला नूर भरो।
भंजित स्वप्न शिलाओं का,
अब खंडहर तुम स्व साफ़ करो।
स्वप्न धरा जो बंजर है,
पुष्पों पर चला जो खंजर है।
दफनाकर उन मृत पुष्पों को,
नव कली की पुनः अभिलाष धरो
भंजित स्वप्न शिलाओं का,
अब खंडहर तुम स्व साफ़ करो।

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