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झूठा वजूद - Jhootha Vajood - hindi series - part 1

झूठा वजूद - भाग १ (hindi series)

अपने आप को ढाँकते कई किरदारों का झूठा वजूद - kuchlikha.com, hindi series part 1
Jhootha Vajood - Hindi Series - Part -1

अक्सर जीवनकाल में कुछ गतिविधियाँ ऐसी होती है जिनके होने का कारण आपको भविष्य में मिलता है। अभियंता की शिक्षा के वक़्त मैं जिस छात्रावास में रहता था, (जगह का साफ साफ बताना तो ठीक नहीं रहेगा,आप बस कल्पना करके अपनी कल्पनाओं की शक्ति को बढ़ाये), उसके पास ही में 1 किलोमीटर लंबी गली को पार करने पर लड़कियों के छात्रावास शुरू होते थे, इस गली में एक लंबा व किफ़ायती बाज़ार है, किफ़ायती से मतलब यह है कि बड़े शहर में होने के बावजूद यहाँ खाने-पीने की चीज़ों की कीमत कम थी। काफी लड़कियाँ यहाँ शाम को घूमने आती थी, और उनके चक्कर में कई सारे लड़के भी। मैं भी आ पहुँचा शाम के वक्त, क्यों आया? इसका जवाब वक़्त के साथ आप खुद ही समझ जायेंगे। फिलहाल के लिये मुझे, आपके मन में पनप रही सोच के अनुसार समझ लीजिये, कि क्यों आया?


आते ही मैंने पहले चक्कर में फिर से गली का मुआयना किया, और कुछ अच्छा महसूस किया, और क्यों न हो, जब सुबह से बासी चेहरे पर,गली में महक रहे इत्र की महक बरस पड़े। मेरी नज़र लड़कियों पर गयी, जो मुझे इस बात का एहसास कराती है कि मैं लड़का ही हूँ। यहाँ कुछ लड़कियाँ खाने पीने आयी थी, कुछ दैनिक आवश्यकतओं की वस्तुएँ लेने, कुछ लड़कों को ताड़ने, कुछ अपने प्रियजनों के साथ और कुछ लड़कियाँ वो थी जो अपनी सहेलियों के साथ आयी थी सिर्फ इसिलये कि खाने को भी मिलेगा और रबड़ने को भी। मैं जल्द ही जान जाता हूँ इस तरह की प्रकृति वाले लोगों को, आखिर कुछ मेरे भी दोस्त है इसमें के। मैं थोड़ा सा वक़्त धूम्रपान के लिये निकालकर एक दुकान की सीढ़ियों पर बैठकर आस-पास के लोगों को देखता हूँ, दरअसल मुझे लोगों की हरकतों को समझने में, और उनमें छिपे रहस्यों को समझना अच्छा लगता है।

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मैं देखता हूँ कि एक लड़का(इसी गाँव का निवासी) मुआवजे से मिले अत्यधिक पैसों को खर्च करने के गँवार तरीके दिखला रहा था, उसने अपनी गाड़ी को अमेरिकन फैशन में तब्दील करके इतनी जोर से गाने चला रखे थे कि बारात के बैंड भी इतनी ज़ोरो से नहीं बजते। वो भी उस सँकरी गली में जहाँ पहले से पैदल लोगो की भीड़ जमा है। खैर इस बात को यहीं छोड़ दिया, क्योंकि उसे टोक कर अपनी साढ़े सत्रह हड्डियाँ तुड़वाना कौन पसंद करता है। अधिकतर भारतीय भी तो यही करते है। भारत के संविधान के तीसरे भाग में एक भारतीय नागरिक के मूल अधिकार बताये गये है जिनमें आपको बोलने, रहने, और जीते रहने की स्वत्रंता है पर हम ये भी जानते है कि भारत में संविधान की व्यवस्था किन लोगों के लिये है।
खैर यहाँ से नज़रें हटाकर मैं एक ज्यूस वाले की दुकान की तरफ देखता हूँ, वहाँ से मुझे अचानक ज़ोरो से हँसने की आवाज़ सुनाई दी थी। मैं देखता हूँ कि एक लड़का दो लड़कियों को हँसाने के यत्न में कामयाब हो गया है। इन तीनो का दल दुकान पर मौजूद था। मैं आखिर इस तरह के लड़कों के बारे में भी जानना चाहता था, तो मैं सीधा जाकर ज्यूस की दुकान पर ठीक लड़के के करीब खड़ा हो गया, और इसकी बातें सुनने लगा। ये दोस्त(वही लड़का) अपनी सुगली और गन्दी हरकतें सुना कर उन दोनों का मनोरंजन कर रहा था। वैसे तो ये लड़का भी चेहरे से इतना खुश दिख रहा था कि शायद इतनी खुशी इसे अपनी सुहागरात के वक़्त कमरें में घुसने से भी नहीं होगी। वैसे इन्हें खुशी किस बात की होती है कि ये खुद को कूल ड्यूड समझते है, और लड़कियों को हँसाकर उनके साथ सेल्फी लेकर उसे व्हाट्सएप्प, फेसबुक पर लगाकर खुद को ब्रम्हाण्ड का इकलौता नसीब वाला अय्याश समझते है। 

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वैसे तो दूसरों को हंसाना(चाहे खुद की कीमत घटाकर ही) अच्छी बात है, तो मैं इसका कारण सोचता हूँ कि ऐसा क्या कारण है कि हद से ज्यादा भद्दे किस्से सुनाकर उन्हें हँसाने की कोशिश कर रहा है, दरअसल इसका कारण है दल, हर किसी को कुछ दोस्तों का दल पसन्द होता है, इसको लड़कियों के साथ रहना पसन्द है और उन्हें हँसाने की कोशिश कर रहा है ताकि वो इसे बोरिंग न समझे और इसके साथ रहना बन्द नहीं कर दे, इसीलिये तो यही भाई अंत मे ज्यूस के पैसे खुद से देगा, जो बाद में कमरे में पहुंचकर, फिर अपनी डायरी में किसी हिसाब में जोड़ देता है।

वैसे लड़कियों के साथ ऐसे लड़के होने भी ज़रूरी है क्योंकि इनको इतना प्यार, और इनका इतना ख्याल तो इनके भाई और इनके प्रेमी भी नहीं करते जितना ये लड़के करते है। ज्यूस खत्म होने में ही था कि इतने में इसके एक दोस्त का फ़ोन आ पहुँचा, इसने फ़ोन उठाया और बोला, हाँ अमित बोल, कैसा है। इतना सुनकर ही मैं समझ गया कि ये लड़को के दल में काफी कम रहता है, वरना उत्तर भारत में दोस्त का फोन आये तो "और भाई क्या हाल है" कहकर पूछता है ना कि उसका नाम लेकर और वो भी अपने कॉलेज के दोस्त से। उधर से वो इससे तरह तरह के सवाल करता है कि कहाँ है, किसके साथ है। हक़ीक़त ये है कि पास में खड़ी दो लड़कियों में से किसी एक का आशिक़ है वो जिसने फ़ोन किया है, और जब वो जान जाता है कि वो वहीं है तो इससे बड़ी-बड़ी नामी होटलों में खाना खाने की बात करता है, वैसे ये वो ही होटलें होती है जिनका नाम हम सबने सुना तो होता है पर जाते तब ही हैं जब हमारे दोस्तो की गैंग में सबसे अमीर दोस्त का जन्मदिन होता है और ये स्वाभाविक भी है।

फ़ोन पर जब वो इससे ये सब बात करता है तो इधर से ये भी बड़े तेवर के साथ अपनी झूठी मजबूरियाँ गिना देता है कि नहीं चल सकूँगा। वैसे ये तीनो लोग जानते है कि फोन पर रहा बन्दा किसका आशिक़ है और वो जिसका आशिक़ होता है वो ही सबसे पहले पूछती है कि कौन था, वो बस इतना ही पूछती है इतने में, लड़का साथ में अपनी तवज्जो बढ़ाने का मौका ढूँढ लेता है और जवाब देता है कि अमित था, यूँही पागल इंसान है वो बोर कर देता है, पूरा छात्रावास इससे परेशान है, बहोत ही बोरिंग लड़का है, मुझसे बोल रहा था होटल(बकायदा होटल का नाम लेकर) में खाना खाने की। मना कर दिया मैंने, यार पहले भी कई बार जा चुका हूँ इस होटल में, बेकार सर्विस है यहाँ की, खाना भी खास नहीं है। (जबकि ये बात पूरी की पूरी झूठ होती है, अरे जब पहली बार में खाना पसंद नहीं आया तो फिर कई बार गया ही क्यों?? दरअसल ये लड़के तो वो है जो किसी ढाबे में भी जाये और वहाँ का खाना खराब निकले तो अपने पूरे मौहल्ले को वहाँ खाना खाने ना जाने दे) इसने अपना वजूद लड़कियों के सामने जमाया ही होता है कि उनमें से एक जो जिसका कोई आशिक़ नहीं होता है(जन्मजात कुँवारी होती है) पहले तो वो भी दो चार उसकी बुराई करती है फिर धीरे से उसका बॉयोडाटा पता करती है कि कहाँ का है ये, फिर उस शहर की, जहाँ का अमित होता है बुराई करती है, थोड़ा सा मुँह भी बिगाड़ लेती है। फिर उसके पापा का व्यवसाय पता करती है(ले देकर उसकी आर्थिक स्थिति पता करती है) और अपनी सहेली का सहयोग अमित से बात करवाने में तभी करती है जब उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो, वरना तो ये उन्हें अगर प्यार हो भी जाये तो उसे तुड़वा दे।

आगे का क़िस्सा अगले भाग में।

©I A M A N K Y T

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