A special Morning - hindi Poem - एक ख़ास सुबह
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| A special Morning - hindi Poem - एक ख़ास सुबह |
आज सुबह में कुछ खास है
एक खिला सा अंदाज है
चिड़ियों का बोलना
सिर्फ बोलना नहीं
किसी संगीत का एहसास है
बागीचे से आती महक
कुछ तुम सी लग रही है
गुलमोहर के झड़ते फूल
जब बालों से सरके
तो लगा तुम ही हो
जो मेरे चेहरे पर आती
लटों को चुपके से
कान के पीछे कर रहे हो
और वही फूल
जब मेरे दामन में बिखर गए
मानो तुमने गले लगाया हो
ये हवा की छुअन
ये तो और भी तुम सी लगती
यूँ तो ये
रोज़ मेरे इतने ही करीब होती है
पर आज इसका इतना करीब होना
तुम्हारे होने जैसा लगता है
हमारे लम्हों की सुगंध लिए
घुल रही है मेरे अन्तर्मन में
एक फूल को उठाकर
जब अपने होठों पर रखा मैंने
उसका अंदाज़ बिल्कुल तुम सा था
प्रेम से भरा
शायद तुम यहीं हो
इन हवाओं में
सुबह की लाली में
फूलों की महक में
खिली खिली कलियों में
अम्बर से धरती तक हर कहीं
हर सुबह में यही लिखती हूँ
कि
"आज सुबह में कुछ खास है
एक खिला सा अंदाज है "
-शिवानी लवानिया

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