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na ram na rahim - ना राम ना रहीम - hindi poem

na ram na rahim - hindi poem - kuchlikha.com
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है कैसा विचित्र बहाव यहाँ,
बह रही है उल्टी धार यहाँ,
कुकर्म-अधर्म का वार यहाँ,
सम्पत्ति बना आधार यहाँ,
ईश्वर-अल्ला में भेद यहाँ,
बन बैठे 'बाबा' हजार यहाँ,
अंधविश्वास का पसरा बाजार यहाँ,
अंधभक्ति की भयावह कतार यहाँ,
धर्म-लिबास में छिपा खूँखार यहाँ,
लूट रही 'अस्मिता' हर बार यहाँ,
मिलाया है जिसने, मिट्टी में खाक यहाँ
घूम रहें हैं दोषी आजाद यहाँ।


फिर क्यों सबके मानस-पटल पर,
मौन-व्रत उपवास यहाँ,
बहुत हुआ अब खत्म करो,
धर्म का नंगा नाच यहाँ,
नष्ट करो अब "हे जनमानस",
"बाबाओं" का काला साम्राज्य यहाँ,
उठो अब तुम अपनी आँखें खोलो,
कर दो नई सुबह की शुरुआत यहाँ,
तुम ही उठो स्वंय बन जाओ,
धर्म-रक्षा की मिसाल यहाँ,
खींच सिंहासन "बाबाओं" की,
आप करो जयकार यहाँ,
हर एक बनो "महाराणा-
-लक्ष्मीबाई" की तलवार यहाँ
गूँज उठा दो दुनिया भर में,
इतिहास बनेगा गवाह यहाँ।

- सुप्रिया भारती -

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